काम और क्रोध से बचना चाहते हैं? स्वामी राम स्वरूप जी ने बताया आत्मसंयम का सरल मार्ग

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आत्मसंयम का महत्व बताया

कठुआ में आयोजित वेद यज्ञानुष्ठान के दौरान स्वामी राम स्वरूप जी ने आत्मसंयम के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि काम और क्रोध मनुष्य के सबसे बड़े शत्रु हैं, जो जीवन को गलत दिशा में ले जाते हैं।

काम और क्रोध से बढ़ती हैं समस्याएं

स्वामी जी के अनुसार, बार-बार काम और क्रोध के प्रभाव में आने से ये विकार और अधिक मजबूत हो जाते हैं। ऐसे में आत्मसंयम बनाए रखना बेहद आवश्यक है। उन्होंने बताया कि ये दोष मानसिक शांति और जीवन की स्थिरता को प्रभावित करते हैं।

योग और प्राणायाम हैं प्रभावी उपाय

स्वामी राम स्वरूप जी ने कहा कि आत्मसंयम प्राप्त करने के लिए नियमित योगाभ्यास, आसन और प्राणायाम करना चाहिए। इससे मन शांत रहता है और काम, क्रोध, लोभ तथा अहंकार जैसे विकारों पर नियंत्रण मिलता है।

नाम-जाप और तपस्या का महत्व

उन्होंने बताया कि जब कोई व्यक्ति क्रोध या नकारात्मक व्यवहार से हमारी शांति भंग करने का प्रयास करे, तब नाम-जाप, तपस्या और योग के माध्यम से आत्मसंयम बनाए रखा जा सकता है। इससे मानसिक शक्ति भी बढ़ती है।

यज्ञ और अग्निहोत्र से मिलता है लाभ

स्वामी जी ने कहा कि यज्ञ और अग्निहोत्र वेदों में बताए गए महत्वपूर्ण आध्यात्मिक साधन हैं। इनके माध्यम से आत्मसंयम विकसित होता है, इन्द्रियों पर नियंत्रण आता है और जीवन में सकारात्मकता बढ़ती है।

सुखमय जीवन का मार्ग

उन्होंने श्रद्धालुओं से नियमित योग, यज्ञ और वेदाध्ययन अपनाने का आह्वान किया। स्वामी जी के अनुसार आत्मसंयम ही वह शक्ति है, जो व्यक्ति को सुख, शांति, दीर्घायु और आध्यात्मिक उन्नति की ओर ले जाती है।

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