पहलगाम में निर्दाेष पर्यटकों पर हुए बर्बर हमले ने कश्मीर के लोगों को जगा दिया है- सज्जाद गनी लोन

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जम्मू, 29 अप्रैल (हि.स.)। पहलगाम में निर्दाेष पर्यटकों पर हुए बर्बर हमले ने कश्मीर के लोगों को जगा दिया है जो अब हिंसा बर्दाश्त नहीं करेंगे। यह सब पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष सज्जाद गनी लोन ने कहा।

22 अप्रैल को हुए आतंकवादी हमले की निंदा करने के लिए जम्मू-कश्मीर विधानसभा द्वारा पारित प्रस्ताव पर बोलते हुए जिसमें 26 लोगों की जान चली गई थी और जिनमें से अधिकतर पर्यटक थे लोन ने जोर देकर कहा कि लोगों को दंडात्मक कार्रवाई करके पीछे धकेलने के बजाय सकारात्मक रूप से शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के कई क्षेत्र पर्यटन क्षेत्र से अपनी आजीविका कमा रहे हैं और यह नृशंस आतंकवादी हमला एक पीढ़ी को उखाड़ फेंकने का सीधा प्रयास था। उन्होंने कहा कि हम अपने देश के आभारी हैं जो 35 साल बाद हमारे मेहमानों पर हुए हमले की स्पष्ट रूप से निंदा करने के लिए जागा है।

लोन ने कहा कि कश्मीरी समाज में हिंसा को सामाजिक मान्यता प्राप्त है लेकिन पहलगाम की घटना के बाद यह बदल गया है। हमने देखा कि हिंसा के सामाजिक कलंक को चिह्नित करने के लिए लोग हर गली-मोहल्ले में बाहर आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोग अब हिंसा को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं, यह हिंसा की सामाजिक पवित्रता के अंत की शुरुआत है। हालांकि उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसा माहौल बनाने की जरूरत है जहां हिंसा की सामाजिक पवित्रता से जुड़ी मानसिकता को बदला जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पिछले 37 वर्षों में कानून लागू करने वालों के लिए सबसे बड़ी चुनौती कई बार निर्दाेष और आतंकवादी के बीच अंतर नहीं कर पाना रहा है।

लोन ने अनुरोध किया कि कानून लागू करने वाली एजेंसियां जानबूझकर या अनजाने में ऐसा कुछ न करें जहां लोगों पर उनकी इच्छा के विरुद्ध मानसिकता थोपी जाए। उन्होंने कहा कि मैं किसी पर कोई आरोप नहीं लगाना चाहता लेकिन सैयद आदिल हुसैन शाह जैसे लोग जिन्होंने पर्यटकों को बचाने के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी, हजारों की संख्या में पैदा किए जाने की जरूरत है। पुलिस और सेना की भूमिका सीमित है क्योंकि यहां के निवासी ही अंततः हिंसा को हराएंगे। कानून लागू करने वाले केवल हिंसा को रोक सकते हैं।

पूर्व मंत्री लोन ने कहा कि आतंकी हमले के खिलाफ लाखों लोगों के सामने आने के बाद देश में माहौल पूरी तरह बदल गया है, लेकिन हमें आतंकवाद के खिलाफ माहौल को बनाए रखने के लिए आवश्यक सुधार करने की जरूरत है और सभी हितधारकों को सकारात्मक तरीके से शामिल करना चाहिए। उन्होंने उन कश्मीरी युवाओं की भी सराहना की जिन्होंने आतंकी हमले के बाद अपनी जान की परवाह किए बिना पर्यटकों की मदद की।

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