संन्यास से पहले बोले उस्मान ख्वाजा – ‘आज भी उन्हीं नस्लीय रूढ़ियों से लड़ रहा हूं, जिनका सामना पूरे करियर में किया’

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ऑस्ट्रेलिया के अनुभवी बल्लेबाज़ उस्मान ख्वाजा ने सिडनी टेस्ट से पहले क्रिकेट जगत को झकझोर देने वाला बयान दिया है। संन्यास के करीब खड़े ख्वाजा ने कहा कि वह आज भी उन्हीं नस्लीय रूढ़िवादी सोचों से जूझ रहे हैं, जिनका सामना उन्होंने अपने पूरे करियर में किया।

39 वर्षीय ख्वाजा, जो ऑस्ट्रेलिया के पहले मुस्लिम टेस्ट क्रिकेटर हैं, ने कहा कि एशेज सीरीज़ के पहले टेस्ट से पहले उन पर उठे सवालों में नस्लीय मानसिकता की झलक थी।

🏏 गोल्फ खेलने पर उठा विवाद

ब्रिस्बेन टेस्ट से पहले गोल्फ खेलने और फिर पीठ में ऐंठन के कारण बाहर रहने को लेकर ख्वाजा की प्रतिबद्धता पर सवाल उठाए गए। इस पर उन्होंने कहा —

“मुझे आलसी, स्वार्थी और गैर-कमिटेड कहा गया — ये वही नस्लीय स्टीरियोटाइप हैं जिनसे मैं बचपन से जूझता आया हूं।”

उन्होंने कहा कि टीम के अन्य खिलाड़ी भी मैच से पहले गोल्फ खेलते हैं या पार्टी करते हैं, लेकिन उन्हें कभी ऐसे सवालों का सामना नहीं करना पड़ता।

🌍 जूनियर क्रिकेट से चला संघर्ष

पाकिस्तान में जन्मे और ऑस्ट्रेलिया में पले-बढ़े ख्वाजा ने बताया कि जूनियर क्रिकेट श्वेत-प्रधान था और वहां भेदभाव आम बात थी।

उन्होंने दो साल पहले जूतों पर लिखे संदेश “Freedom is a human right” को लेकर आईसीसी से हुए विवाद को भी याद किया।

🔮 भविष्य को लेकर उम्मीद

ख्वाजा ने कहा कि क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया में बदलाव आ रहा है, लेकिन अभी रास्ता लंबा है।

“मेरी उम्मीद है कि अगला उस्मान ख्वाजा, किसी जॉन स्मिथ जितनी आसानी से ऑस्ट्रेलिया की टीम में जगह बना सके।”

🏏 क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया का समर्थन

सीईओ टॉड ग्रीनबर्ग ने कहा —

“उस्मान ने क्रिकेट को ज़्यादा समावेशी बनाने में बड़ी भूमिका निभाई है। उनकी विरासत मैदान से कहीं आगे तक जाएगी।”

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