🔹 क्या है पूरा मामला?
यशपाल आर्य ने उत्तराखंड ऊर्जा सुरक्षा विवाद को लेकर राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि जल विद्युत परियोजनाओं से जुड़ी बहुमूल्य भूमि को निजी क्षेत्र को सौंपने का फैसला प्रदेश की ऊर्जा आत्मनिर्भरता के खिलाफ है।
🔹 76 हेक्टेयर से ज्यादा भूमि का मामला
शासनादेश 03 दिसंबर 2025 के तहत उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड की डाकपत्थर और ढालीपुर परियोजनाओं से जुड़ी 76.7348 हेक्टेयर भूमि हस्तांतरण के निर्देश दिए गए हैं।
आर्य का कहना है कि जिला प्रशासन को सीमांकन और अधिग्रहण के आदेश देना यह दर्शाता है कि सरकार इस निर्णय को जल्दबाजी में लागू करना चाहती है।
🔹 रणनीतिक परियोजनाओं पर असर?
उत्तराखंड ऊर्जा सुरक्षा विवाद इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि इसी क्षेत्र से यमुना स्टेज-1, स्टेज-2, व्यासी, लखवाड़ और किशाऊ जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाएं जुड़ी हैं। भौगोलिक परिस्थितियों के कारण वैकल्पिक भूमि उपलब्ध कराना आसान नहीं है।
🔹 राष्ट्रीय परियोजनाओं पर भी प्रभाव
आर्य का दावा है कि यदि भूमि निजी हाथों में गई तो भारत सरकार की यमुना पुनर्जीवन योजना पर भी असर पड़ सकता है।
🔹 आंदोलन की चेतावनी
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि यदि सरकार ने निर्णय वापस नहीं लिया तो सड़कों से लेकर सदन तक आंदोलन किया जाएगा।



