पश्चिम बंगाल में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान एक बड़ा खुलासा सामने आया है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) कार्यालय ने ऐसे 14 मतदाताओं की पहचान की है जिनके पास भारतीय वोटर आईडी कार्ड के साथ-साथ बांग्लादेशी पासपोर्ट भी है। यह मामला राज्य की चुनावी शुचिता और राष्ट्रीय सुरक्षा दोनों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है।
🔍 कैसे हुआ खुलासा
अधिकारियों को इनपुट मिले थे कि कुछ मतदाता मूल रूप से बांग्लादेशी नागरिक हो सकते हैं। इसके आधार पर कोलकाता स्थित विदेशियों के क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (FRRO) से सत्यापन कराया गया।
FRRO की रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि ये सभी 14 लोग वैध वीजा पर भारत आए थे, लेकिन वीजा अवधि समाप्त होने के बाद भी वापस नहीं लौटे। इसके बाद उन्होंने कथित तौर पर भारतीय पहचान पत्र हासिल कर लिए और मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज करा लिया।
📌 नाम हटाने की सिफारिश
मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने भारत निर्वाचन आयोग को सिफारिश भेजी है कि इन 14 बांग्लादेशी पासपोर्ट धारकों के नाम अंतिम मतदाता सूची से हटाए जाएं।
अंतिम मतदाता सूची 14 फरवरी को प्रकाशित की जानी है।
📍 संवेदनशील जिलों से जुड़े मामले
ये सभी मामले उत्तर 24 परगना, नदिया और पूर्व मेदिनीपुर जिलों से सामने आए हैं। ये तीनों जिले भारत-बांग्लादेश सीमा से सटे हैं और पहले से ही अवैध घुसपैठ और फर्जी दस्तावेजों को लेकर सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी में रहते हैं।
🕵️♂️ संगठित फर्जीवाड़े का आरोप
जांच एजेंसियों — पश्चिम बंगाल पुलिस और प्रवर्तन निदेशालय — के अनुसार,
अवैध घुसपैठियों को भारतीय व्यवस्था में शामिल करने के लिए एक संगठित नेटवर्क काम कर रहा था।
जांच में सामने आया कि:
- पहले घुसपैठियों को सीमा से सटे गांवों में पनाह दी जाती थी
- फिर फर्जी जन्म प्रमाण पत्र और राशन कार्ड बनवाए जाते थे
- इसके आधार पर आधार कार्ड और पैन कार्ड तैयार किए जाते थे
- और अंत में वोटर आईडी और कुछ मामलों में भारतीय पासपोर्ट तक हासिल कर लिया जाता था
इस बहु-स्तरीय फर्जी प्रक्रिया के जरिए कई लोग मतदाता सूची में शामिल हो गए, जो भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था और आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा माना जा रहा है।




