पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से 30 लाख नाम हटने की संभावना, आयोग ने शुरू किया सख्त निरीक्षण
कोलकाता, 29 नवंबर (हि.स.)। पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान एक बड़ा खुलासा सामने आया है। चुनाव आयोग के आकलन के अनुसार, राज्य की मतदाता सूची से करीब 30 लाख नाम हटाने पड़ सकते हैं। इनमें लगभग 16 लाख नाम मृत मतदाताओं के हैं, जबकि शेष नाम लापता, डुप्लीकेट, या स्थाई रूप से दूसरे राज्यों में जा चुके मतदाताओं से जुड़े हैं।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह अनुमान अब तक हुए डिजिटाइजेशन के आधार पर लगाया गया है। शुक्रवार शाम तक कुल 6.73 करोड़ एन्यूमरेशन फॉर्म का डिजिटाइजेशन पूरा हो चुका है, जो कि 7.66 करोड़ पंजीकृत मतदाताओं का लगभग 88 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि पूर्ण प्रक्रिया समाप्त होने पर यह संख्या और बढ़ सकती है।
9 दिसंबर को साफ होगी पूरी तस्वीर
चुनाव आयोग के अनुसार, हटाए जाने वाले नामों की अंतिम सूची 9 दिसंबर को स्पष्ट होगी, जब ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी की जाएगी।
बीएलओ पर दबाव की शिकायतों के बाद आयोग सक्रिय
पुनरीक्षण के दौरान बूथ स्तर अधिकारियों (बीएलओ) पर तृणमूल कांग्रेस और स्थानीय प्रशासन के दबाव की शिकायतें बढ़ने लगी थीं। इस पर चुनाव आयोग ने कड़ा रुख अपनाते हुए:
- सेवानिवृत्त IAS अधिकारी सुभ्रता गुप्ता को विशेष प्रवेक्षक नियुक्त किया
- 11 अन्य IAS अधिकारियों की टीम को उनकी सहायता के लिए जोड़ा
- राज्य के DGP राजीव कुमार और कोलकाता पुलिस कमिश्नर मनोज वर्मा को पत्र भेजकर बीएलओ की सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा
- मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल को झुग्गियों, ऊंची इमारतों और गेटेड सोसाइटीज में बूथ स्थापना से जुड़े दिशा-निर्देश कड़ाई से लागू करने के आदेश दिए
केंद्रीय टीम करेगी निगरानी
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि एसआईआर की पूरी प्रक्रिया की निगरानी केंद्रीय प्रवेक्षकों की टीम करेगी, और उनकी रिपोर्ट सीधे केंद्र सरकार को भेजी जाएगी।




