▶️ वोट बहिष्कार की चेतावनी से हलचल
पश्चिम मेदिनीपुर जिले के पाथरा गांव में कबीर पुरस्कार से सम्मानित सामाजिक कार्यकर्ता यासिन पठान ने आगामी चुनाव में मतदान के बहिष्कार की चेतावनी दी है। उनके इस बयान से स्थानीय राजनीति में हलचल मच गई है।
▶️ मतदाता सूची में नाम ‘विचाराधीन’
यासिन पठान का कहना है कि उनके बेटे और दो बेटियों के नाम मतदाता सूची में ‘अंडर एडजुडिकेशन’ यानी विचाराधीन श्रेणी में डाल दिए गए हैं। उन्होंने दावा किया कि सभी आवश्यक दस्तावेज पहले ही जमा कर दिए गए थे, इसके बावजूद यह स्थिति बनी हुई है।
▶️ पहले कर चुके हैं कई बार मतदान
उन्होंने बताया कि उनका परिवार वर्षों से मतदान करता आ रहा है। उनके बेटे और बेटियां भी पहले कई बार वोट डाल चुके हैं, लेकिन अब उनके नाम सूची में स्पष्ट रूप से शामिल नहीं होने से परिवार में नाराजगी है।
▶️ प्रशासन को दी चेतावनी
यासिन पठान ने स्पष्ट कहा कि यदि उनके बच्चों के मताधिकार को बहाल नहीं किया गया, तो पूरा परिवार इस बार चुनाव में हिस्सा नहीं लेगा।
▶️ राजनीतिक प्रतिक्रिया तेज
इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं।
- तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार दिनेन राय ने प्रक्रिया पर सवाल उठाए
- भाजपा उम्मीदवार शंकर गुच्छैत ने कहा कि चुनाव आयोग निष्पक्ष जांच करेगा
▶️ क्यों खास है पाथरा गांव?
पाथरा गांव ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, जहां कांगसबती नदी के किनारे 17वीं-18वीं शताब्दी के कई प्राचीन मंदिर मौजूद हैं।
यासिन पठान ने इन मंदिरों के संरक्षण में अहम भूमिका निभाई है और सांप्रदायिक सौहार्द के लिए उन्हें कबीर पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।



