India Space Journey for Public Welfare: एक अलग सोच, एक अलग रास्ता
पूर्व ISRO प्रमुख ए.एस. किरण कुमार के अनुसार,
India Space Journey नीति की जड़ में Public Welfare रहा है, न कि सैन्य प्रभुत्व।
जहां कई देशों ने:
- सैटेलाइट्स को हथियार बनाया
- स्पेस को युद्ध का मैदान बनाया
वहीं भारत ने अंतरिक्ष को:
👉 रोटी, कपड़ा और मकान से जोड़ा।
🛰️ मिसाइल नहीं, जनता के काम आया स्पेस
अपने भाषण में उन्होंने बताया कि
Indian Space Research Organisation (ISRO) ने शुरुआत से ही स्पेस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल:
- 🌾 किसानों के लिए फसल अनुमान
- 🌧️ मौसम पूर्वानुमान और बारिश की जानकारी
- 🌊 बाढ़, चक्रवात और आपदा प्रबंधन
- 🏠 शहरी और ग्रामीण प्लानिंग
- 📡 दूरदराज़ इलाकों में संचार और शिक्षा
के लिए किया।
यानी अंतरिक्ष से मिलने वाला डेटा सीधे आम आदमी की ज़िंदगी को बेहतर बनाता रहा।
🍞 “रोटी-कपड़ा-मकान” से जुड़ा स्पेस

किरण कुमार ने बेहद सरल शब्दों में कहा:
“हमने अंतरिक्ष को मिसाइलों के लिए नहीं,
बल्कि लोगों की बुनियादी जरूरतों के लिए इस्तेमाल किया।”
- सैटेलाइट इमेजरी से खेती बेहतर हुई
- मौसम की सटीक जानकारी से भोजन सुरक्षा बढ़ी
- टाउन प्लानिंग से रहने के बेहतर साधन बने
यही भारत की स्पेस सोच की आत्मा है।
🌍 दुनिया के लिए भारत क्यों बना मिसाल?
कम बजट, सीमित संसाधन और फिर भी:
- चंद्र मिशन
- मंगल तक पहुंच
- सस्ती लॉन्च सर्विस
भारत ने साबित किया कि:
👉 स्पेस ताकत का नहीं, जिम्मेदारी का क्षेत्र है।
इसी कारण भारत की अंतरिक्ष यात्रा को
शांतिपूर्ण, समावेशी और मानव-केंद्रित माना जाता है।
🧠 BHU में दिया गया संदेश क्यों खास है?
BHU जैसे शैक्षणिक संस्थान में यह संदेश देना:
- युवाओं को सही दिशा दिखाता है
- विज्ञान को समाज से जोड़ता है
- बताता है कि टेक्नोलॉजी का उद्देश्य सिर्फ ताकत नहीं, सेवा भी है
🌱 आने वाली पीढ़ी के लिए सबक
इस पूरी यात्रा से एक साफ संदेश निकलता है:
- विज्ञान अगर मानवता से जुड़ा हो, तो चमत्कार करता है
- ताकत से नहीं, सोच से इतिहास बनता है
- स्पेस में भी शांति संभव है





