🛕 54 वर्षों की अनोखी परंपरा
आनंदी दास दुर्गा मूर्ति निर्माण की कहानी बेहद प्रेरणादायक है।
सहरसा के गौतम नगर में वे पिछले 54 वर्षों से खुद मूर्ति बनाकर पूजा कर रहे हैं।
हर साल चैत्र नवरात्र में यह परंपरा निभाई जाती है।
🙏 आस्था से मिली प्रेरणा
आनंदी दास दुर्गा मूर्ति निर्माण की शुरुआत संघर्ष के बीच हुई।
उन्होंने बताया कि कठिन समय में भी उन्होंने भगवान पर भरोसा रखा।
इसी आस्था से उन्हें मूर्ति बनाने की प्रेरणा मिली।
🎨 खुद सीखी मूर्ति बनाने की कला
आनंदी दास दुर्गा मूर्ति निर्माण के लिए किसी गुरु के पास नहीं गए।
आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उन्होंने खुद ही कला सीखी।
पहली बार में ही सफल होने से उनका विश्वास और मजबूत हुआ।
👨👩👦 परिवार का सहयोग
अब आनंदी दास दुर्गा मूर्ति निर्माण में उनका परिवार भी साथ देता है।
उनके पुत्र और अन्य सदस्य इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।
पूरा परिवार मिलकर पूजा-अर्चना में जुटा रहता है।
🌸 भव्य पूजा और आयोजन
आनंदी दास दुर्गा मूर्ति निर्माण के साथ कई धार्मिक आयोजन होते हैं।
नवरात्र में कलश स्थापना, हवन और कन्या पूजन किया जाता है।
कार्तिक माह में काली पूजा भी धूमधाम से होती है।
💫 बिना चंदे के आयोजन
इस परंपरा की खास बात यह है कि कोई चंदा नहीं लिया जाता।
पूजा का पूरा खर्च आनंदी दास स्वयं उठाते हैं।
यह उनकी सच्ची भक्ति और समर्पण का उदाहरण है।



