🌄 शिमला में अनोखी खोज
शिमला के खड़ापत्थर क्षेत्र में हुई शिमला जीवाश्म खोज ने वैज्ञानिकों को काफी हैरान कर दिया है।
पेड़ जैसी आकृति वाला यह पत्थर अब जीवाश्मों का समूह माना जा रहा है।
🔍 2019 में पहली बार मिली जानकारी
इस अनोखी संरचना को पहली बार वर्ष 2019 में वन विभाग की टीम ने देखा था।
करीब से जांच करने पर इसकी बनावट सामान्य चट्टानों से काफी अलग पाई गई।
🧪 वैज्ञानिकों ने किया अध्ययन
बाद में इस शिमला जीवाश्म खोज का अध्ययन विशेषज्ञों और शोधार्थियों द्वारा विस्तार से किया गया।
रिपोर्ट में इसे मध्यजीवी काल का बताया गया, जिसकी उम्र करीब 25 करोड़ साल मानी गई।
🌳 पेड़ जैसा दिखता है जीवाश्म
यह जीवाश्म देखने में बिल्कुल एक बड़े पेड़ जैसा लगता है, जो बेहद आकर्षक है।
इसका आकार लगभग 12 फीट लंबा और 8 फीट चौड़ा बताया गया है।
📊 पर्यावरण की मिलती है जानकारी
विशेषज्ञों के अनुसार, शिमला जीवाश्म खोज से पुराने समय के वातावरण की जानकारी मिलती है।
यह बताता है कि उस समय की जलवायु आज से काफी अलग थी।
🪨 कैसे बनता है ऐसा जीवाश्म?
वैज्ञानिकों का मानना है कि यह “पेट्रीफाइड वुड” यानी पत्थर बनी प्राचीन लकड़ी है।
समय के साथ खनिजों के जमाव से लकड़ी पत्थर में बदल जाती है।
🔥 क्यों है यह खोज खास?
यह शिमला जीवाश्म खोज न केवल वैज्ञानिकों के लिए बल्कि इतिहास के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है।
ऐसी खोजें हमें करोड़ों साल पुराने जीवन को समझने में मदद करती हैं।



