किसानों के लिए हरित खाद का महत्व
कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को हरित खाद अपनाने की सलाह दी है। उनका कहना है कि हरित खाद मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के साथ-साथ खेती की लागत कम करने में भी मदद करती है। यह तकनीक प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में सहायक
कृषि वैज्ञानिक डॉ. निमिषा नटराजन के अनुसार, हरित खाद के प्रयोग से मिट्टी में जैविक कार्बन की मात्रा बढ़ती है। इसके साथ ही मिट्टी की संरचना मजबूत होती है और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होती है।
किसानों को किया गया जागरूक
खेत बचाओ अभियान के तहत किसानों को हरित खाद के लाभों के बारे में जागरूक किया जा रहा है। विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों और किसान गोष्ठियों के माध्यम से बड़ी संख्या में किसानों को इस तकनीक की जानकारी दी गई।
ढैंचा और सनई की खेती पर जोर
विशेषज्ञों ने बताया कि ढैंचा और सनई जैसी फसलें हरित खाद के लिए बेहद उपयोगी हैं। ये फसलें 45 से 60 दिनों में तैयार हो जाती हैं। बाद में इन्हें खेत में मिलाने से मिट्टी में नाइट्रोजन और अन्य आवश्यक पोषक तत्वों की मात्रा बढ़ती है।
उत्पादन लागत होगी कम
हरित खाद के नियमित उपयोग से मिट्टी की जल धारण क्षमता बढ़ती है और सूक्ष्मजीव अधिक सक्रिय होते हैं। इससे फसलों की गुणवत्ता बेहतर होती है तथा उत्पादन लागत में कमी आती है।
किसानों की आय बढ़ाने का अवसर
कृषि वैज्ञानिकों ने खरीफ सीजन की बुवाई से पहले हरित खाद अपनाने की अपील की है। उनका मानना है कि हरित खाद के प्रयोग से मिट्टी अधिक उपजाऊ बनेगी, फसल उत्पादन बढ़ेगा और किसानों की आय में सकारात्मक सुधार देखने को मिलेगा।



