पत्रकार हत्याकांड में पीडब्लूडी के इंजीनियर कोड़ोपी की अग्रिम जमानत याचिका हुई खारिज

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बीजापुर, 30 जनवरी (हि.स.)। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित पत्रकार मुकेश हत्याकांड से जुडे मामले में पीडब्लूडी के ईई, एसडीओ व सब इंजीनियर को सहआरोपित बनाया गया है, जिसमें पीडब्लूडी के रिटायर्ड ईई बीआर. ध्रुव, एसडीओ आरके. सिन्हा और इंजीनियर जीएस. कोड़ोपी पर धारा 3 (5), 316 (5), 318 (4) के तहत गंगालूर थाने में मामला दर्ज हुआ है। एक जनवरी काे युवा पत्रकार मुकेश की हत्या के बाद हत्या के आरोपित सुरेश चंद्राकर द्वारा गंगालूर-मिरतुर सड़क में भ्रष्टाचार को लेकर पीडब्लूडी के कार्यपालन अभियंता ने एफआईआर दर्ज करवाई थी। फिलहाल सभी आरोपित पुलिस गिरफ्त से बाहर हैं। इसी बीच इंजीनियर कोड़ोपी ने दंतेवाड़ा सत्र न्यायालय में अग्रिम जमानत की याचिका लगाई थी, जिसे न्यायालय ने आज गुरुवार काे खारिज कर दिया है। इस बीच पता चला है कि पत्रकार हत्याकांड की जांच के लिए बनाई गई एसआईटी एसडीओ सिन्हा से अलग से पूछताछ कर सकती है।

उल्लेखनीय है कि गंगालूर-मिरतुर के बीच बनी जिस सड़क का भ्रष्टाचार पत्रकार मुकेश चंद्रकार ने उजागर किया था, उस पर पीडब्ल्यूडी के ईई मधेश्वर प्रसाद ने एक जनवरी काे युवा पत्रकार मुकेश की हत्या की घटना के 22 दिन बाद एफआईआर दर्ज करवाई। हत्या में शामिल ठेकेदार, उसके सहयोगियों व भाइयों को गिरफ्तार किया जा चुका है। 22 जनवरी को पूर्व ईई बीआर ध्रुव, एसडीओ आरके सिन्हा व सब इंजीनियर जीएस कोड़ोपी पर एफआईआर दर्ज की है। उल्लेखनीय है कि गंगालूर-मिरतुर सड़क निर्माण में हुए भ्रष्टाचार का खुलासा पत्रकार मुकेश चंद्रकार ने किया था, जिसके बाद इस सड़क का घटिया निर्माण करने वाले ठेकेदार सुरेश चंद्रकार, उसके भाई रितेश चंद्रकार, दिनेश चंद्रकार व सुपरवाइजर महेंद्र रामटेके को पहले ही पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है। हत्या के इस मामले में ईई, एसडीओ व सब इंजीनियर को सहआरोपी बनाया गया है। भारतीय न्याय संहिता की धारा 3 (5) के तहत ईई, एसडीओ व सब इंजीनियर के खिलाफ सामूहिक रूप से आपराधिक कृत्य करने, धारा 316 (5) के तहत सरकारी अफसर या कर्मचारी द्वारा भ्रष्टाचार करने और धारा 318 (4) के तहत धोखाधड़ी व बेईमानी करते हुए अपराधों से जुड़कर संपत्ति हासिल करने के चलते एफआईआर दर्ज की गई है।

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