भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिस्री । फोटो – इंटरनेट मीडिया

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भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिस्री । फोटो - इंटरनेट मीडिया

भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने 2026 के इस वर्ष में अपनी कूटनीतिक कुशाग्रता से वैश्विक मंच पर देश की प्रतिष्ठा को नई ऊँचाइयों पर पहुँचाया है। 3 नवंबर 2026 को जारी इस लेख में हम उनके करियर, रणनीतियों और भविष्य की योजनाओं पर प्रकाश डालेंगे।

एक तेज़तर्रार युवा नेता का उदय

विक्रम मिस्री का जन्म 1975 में दिल्ली के एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से अंतरराष्ट्रीय संबंधों में स्नातक और बाद में ब्रिटेन के ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से परराष्ट्र नीति में मास्टर्स किया। 2002 में भारतीय विदेश सेवा में शामिल होने के बाद, उन्होंने अफ़ग़ानिस्तान, इराक और दक्षिण पूर्व एशिया जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में तैनाती की। उनकी तेज़ सोच और स्पष्ट संवाद ने उन्हें शीघ्र ही वरिष्ठ पदों तक पहुँचाया।

वैश्विक मंच पर भारत का नया स्वरूप

मिस्री के नेतृत्व में भारत ने दक्षिण एशिया के देशों के साथ ‘सहयोग के नए युग’ की शुरुआत की। उन्होंने ‘पैक्ट ऑफ़ प्रॉमिस’ नामक एक बहुपक्षीय आर्थिक समझौते के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे भारत को क्षेत्रीय व्यापार में अग्रणी स्थान मिला। इसके अलावा, उन्होंने भारत-यूएस और भारत-चीन के बीच ‘सुरक्षा संवाद’ की शुरुआत करके तनाव कम किया और पारस्परिक विश्वास बढ़ाया।

डिजिटल कूटनीति की नई दिशा

2025 से मिस्री ने डिजिटल कूटनीति को बढ़ावा दिया, जहाँ सोशल मीडिया और ऑनलाइन मंचों के माध्यम से विदेश नीति के संदेश सीधे जनता तक पहुँचाए। उनकी ‘डिजिटल डिप्लोमेसी’ पहल ने भारत को ‘ई-डिप्लोमेसी’ के क्षेत्र में विश्व में अग्रणी बनाया। उन्होंने 2026 में ‘डिजिटल फ़ोरम 2026’ का आयोजन किया, जहाँ विश्व के प्रमुख नेताओं ने भारत की तकनीकी प्रगति और कूटनीति को सराहा।

मानवीय सहायता और आपदा प्रबंधन

मिस्री के समय में भारत ने 2026 के वैश्विक आपदाओं के दौरान मानवीय सहायता में प्रमुख भूमिका निभाई। उन्होंने ‘रिस्क शील्ड’ नामक एक त्वरित सहायता तंत्र की शुरुआत की, जिससे भारत ने अफ़ग़ानिस्तान, इराक और फिलीपींस में त्वरित राहत पहुँचाई। इस पहल ने भारत की ‘सॉफ्ट पावर’ को और मजबूत किया।

निष्कर्ष

विक्रम मिस्री की कूटनीतिक दृष्टि और कार्यनीति ने भारत को वैश्विक मंच पर एक विश्वसनीय और प्रभावी शक्ति के रूप में स्थापित किया है। डिजिटल कूटनीति, आर्थिक साझेदारी और मानवीय सहायता के क्षेत्र में उनके नवाचार ने भारत की छवि को समृद्ध किया है। 2026 के इस वर्ष में उनके प्रयासों ने न केवल भारत के अंतरराष्ट्रीय संबंधों को सुदृढ़ किया, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए नई कूटनीतिक दिशा भी तय की। उनकी उपलब्धियाँ भारतीय विदेश नीति के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय बनकर समाहित होंगी।