मप्रः विश्व धरोहर सांची में शांति, समृद्धि और विश्व बंधुता को समर्पित महाबोधि महोत्सव आज से
रायसेन, 29 नवंबर (हि.स.)। यूनेस्को विश्व धरोहर सांची में शनिवार से मध्य प्रदेश संस्कृति विभाग द्वारा दो दिवसीय महाबोधि महोत्सव का शुभारंभ हो रहा है। बुद्ध जम्बूद्वीप पार्क परिसर में आयोजित यह महोत्सव शांति, करुणा और विश्व बंधुत्व का संदेश देने वाला धार्मिक-सांस्कृतिक उत्सव है, जिसमें श्रीलंका, जापान, थाईलैंड और वियतनाम के बौद्ध अनुयायी और कलाकार शिरकत करेंगे।
श्रीलंका के कलाकार देंगे लोकनृत्य और गायन की प्रस्तुति
संस्कृति विभाग के संचालक एन.पी. नामदेव ने बताया कि समारोह में श्रीलंका के कलाकार पारंपरिक लोकनृत्य और गायन प्रस्तुत करेंगे। भोपाल के पंचशील सांस्कृतिक मंच और संघरत्ना बनकर द्वारा बुद्ध के जीवन पर आधारित नृत्य-नाटिका भी प्रस्तुत की जाएगी। ‘द साया बैंड’ भक्ति संगीत से वातावरण को आध्यात्मिक बनाएगा।
पहले दिन होंगे सांस्कृतिक कार्यक्रम, दूसरे दिन कवि सम्मेलन
पहले दिन शाम 6.30 बजे उद्घाटन समारोह होगा, जिसमें प्रदेश के संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री धर्मेन्द्र सिंह लोधी मुख्य अतिथि होंगे। दूसरे दिन श्रीलंका की ललिता गोमरा और दल पुनः प्रस्तुति देंगे। समापन पर अखिल भारतीय कवि सम्मेलन आयोजित होगा, जिसमें सूर्यकुमार पांडेय, स्वयं श्रीवास्तव, हिमांशी बाबरा समेत कई कवि काव्यपाठ करेंगे।
सांची के दुर्लभ अस्थि कलशों के दर्शनों का अवसर
सांची स्तूप में भगवान बुद्ध के प्रिय शिष्यों सारिपुत्र और महामोदग्लायन की पवित्र अस्थियां रखी हैं। इन्हें श्रद्धालुओं के लिए वर्ष में केवल एक बार—इसी महोत्सव के दौरान—दो दिन तक सूर्योदय से सूर्यास्त तक दर्शन के लिए बाहर निकाला जाता है।
सांची स्तूप का गौरवशाली इतिहास
तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व सम्राट अशोक द्वारा निर्मित सांची स्तूप भारत के प्राचीनतम बौद्ध स्मारकों में से एक है। बाद में शुंग और सातवाहन शासकों ने इसका विस्तार किया। 1952 में पंडित जवाहरलाल नेहरू ने अस्थि कलश स्थापना कार्यक्रम में भाग लेकर इसे विशेष आयोजन का रूप दिया, जो आज वैश्विक बौद्ध समुदाय के लिए सबसे बड़ा धार्मिक उत्सव बन चुका है।




