आत्मनिर्भरता की मिसाल बनी दिलमोती
छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में दिलमोती आत्मनिर्भर कहानी प्रेरणा का स्रोत बन गई है।
सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने मेहनत और हुनर से अपनी अलग पहचान बनाई।
समूह से जुड़कर मिली नई दिशा
दिलमोती “एकता समूह” से जुड़ीं, जहां से उन्हें आर्थिक और सामाजिक सहयोग मिला।
बैंक लिंकेज के माध्यम से मिली सहायता ने उनके जीवन को नई दिशा दी।
इससे दिलमोती आत्मनिर्भर कहानी की शुरुआत हुई।
लोहे के औजार बनाकर कमाई
दिलमोती अब हंसिया, कुल्हाड़ी, तवा और फावड़ा जैसे उपयोगी उपकरण तैयार करती हैं।
उनके उत्पाद स्थानीय बाजार में पसंद किए जा रहे हैं, जिससे आय में बढ़ोतरी हो रही है।
इससे दिलमोती आत्मनिर्भर कहानी और मजबूत हुई।
मार्गदर्शन से मिली सफलता
उनकी सफलता में संतोषी अगरिया का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
सही मार्गदर्शन और सहयोग ने उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
इस पहल ने दिलमोती आत्मनिर्भर कहानी को नई ऊंचाई दी।
ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा
दिलमोती की यात्रा यह साबित करती है कि अवसर मिलने पर महिलाएं आत्मनिर्भर बन सकती हैं।



