भारत की ऐतिहासिक उपलब्धि
भारत ने बाल मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी दर्ज कर वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बनाई है।
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार, यह उपलब्धि भारत की प्रभावी स्वास्थ्य नीतियों और सतत प्रयासों का परिणाम है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी इसे देश की सामूहिक सफलता बताया है।
आंकड़ों में सफलता की कहानी
रिपोर्ट के अनुसार:
- नवजात मृत्यु दर: 1990 में 57 → 2024 में 17 (लगभग 70% कमी)
- पांच वर्ष से कम आयु मृत्यु दर: 127 → 27 (लगभग 79% कमी)
ये आंकड़े दर्शाते हैं कि भारत में बाल मृत्यु दर गिरावट एक बड़ी उपलब्धि है।
सरकार की योजनाओं का बड़ा योगदान
भारत सरकार की कई योजनाओं ने इसमें अहम भूमिका निभाई:
- राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन
- जननी सुरक्षा योजना
- प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान
इन योजनाओं ने दूर-दराज क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाईं और मातृ-शिशु देखभाल को मजबूत किया।
टीकाकरण और जागरूकता का असर
सार्वभौमिक टीकाकरण और मिशन इंद्रधनुष जैसे अभियानों ने बच्चों को गंभीर बीमारियों से बचाया।
आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने जागरूकता फैलाकर स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाई।
संस्थागत प्रसव और आधुनिक देखभाल
अस्पतालों में प्रसव बढ़ने और NICU सुविधाओं के विस्तार से नवजात शिशुओं की जान बचाने में मदद मिली।
इससे प्रसव से जुड़े जोखिमों में कमी आई।
तकनीक और डेटा की भूमिका
डिजिटल प्लेटफॉर्म और डेटा आधारित निगरानी से स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार हुआ।
इससे योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन संभव हुआ।
अभी भी हैं चुनौतियां
हालांकि प्रगति हुई है, लेकिन कुछ समस्याएं बनी हुई हैं:
- ग्रामीण-शहरी असमानता
- कुपोषण
- गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता
इन पर लगातार काम करने की जरूरत है।
वैश्विक स्तर पर भारत की भूमिका
दक्षिण एशिया में बाल मृत्यु दर में गिरावट में भारत की भूमिका अहम रही है।



