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77 साल बाद भी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी का परिवार फावड़ा चलाने को मजबूर

जीवन यापन के लिए सेनानी के परिवार के तमाम लोग दिन भर करते हैं मजदूरीहमीरपुर, 31 दिसम्बर (हि.स.)। हमीरपुर जिले में आजादी के 77 साल बाद भी एक स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के परिवार की तस्वीर नही बदली। इस परिवार के तमाम लोग आज भी फावड़े चलाकर जीवन यापन कर रहे है। हैरत की बात तो यह है कि सरकार की चल रही तमाम योजनाएं भी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के परिवार के लिए मजाक बन गई है। परिवार के लोग अलग-अलग जर्जर घरों में रहने को मजबूर है।

हमीरपुर जिले के कुरारा क्षेत्र के कंडौर गांव के रहने वाले बैजनाथ सिंह ने देश की आजादी के लिए सड़कों पर आंदोलन चलाया था। अंग्रेजी हुकूमत से बगावत कर आजादी के लिए क्षेत्र के गांवों में आम लोगों में जोश भरा था। लेकिन इनके परिवार के लोग यहां गांव में बदहाली का जीवन जीने को मजबूर है। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बैजनाथ सिंह का नाम कुरारा विकास खंड परिसर में लगे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी अशोक स्तंभ में पहले नंबर है दर्ज है। बावजूद इनकी पीढ़ी के लोग आज भी मजदूरी करते है। इनके चार पुत्र जगरूप सिंह, शिवनायक सिंह, लोकी सिंह व लल्लू सिंह थे जिनमें मौजूदा में लल्लू सिंह है। जगरूप सिंह के तीन पुत्र राजा सिंह, अतबल सिंह व नेपाल सिंह मौजूदा में गांव में रहते है। इन सभी की माली हालत दयनीय है। रहने को पुश्तैनी घर है छते पक्की नही है। सभी के घर जर्जर हालत में है।

जीवन यापन के लिए सेनानी के परिवार के तमाम लोग दिन भर करते हैं मजदूरीस्वतंत्रता संग्राम सेनानी बैजनाथ सिंह के नाती अतबल सिंह ने बताया कि परिवार के लोग जीवन यापन के लिए दिन भर मजदूरी करते है। मजदूरी से ही घर का खर्च चलता है। बताया कि ग्राम पंचायत में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी की स्मृति में उनके नाम का पत्थर लगाया गया है। परिजनों को भी सरकार द्वारा सम्मानित किया गया था लेकिन देश की आजादी में योगदान देने वाले का परिवार आज बदहाली की जीवन जीने को मजबूर है।

स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के परिजनों को सरकारी योजनाओं का नहीं मिला लाभअतबल सिंह समेत अन्य परिजनों ने बताया कि परिवार के किसी भी सदस्य को सरकार की योजनाओं का लाभ आज तक नहीं मिला। तीन भाईयों में एक भाई का राशन कार्ड किसी तरह बन पाया है जबकि परिवार के अन्य लोगों को मुफ्त राशन की योजना के कार्ड की सौैगात नहीं मिल सकी। बताया कि परिवार के सभी लोग अलग-अलग रहते है। पेंशन, शौचालय और प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास की सुविधा भी आज तक नहीं मिल सकी।

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