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एफआईआर दर्ज होने मात्र से सस्ते गल्ले की दुकान का लाइसेंस निरस्त करना अवैध

-तमाम जिला आपूर्ति अधिकारियों का आदेश रद्द, तत्काल दुकान बहाली का निर्देश

प्रयागराज, 10 जून (हि.स.)। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3/7 में एफआईआर दर्ज होने मात्र से सस्ते गल्ले की दुकान का लाइसेंस निलम्बित-निरस्त नहीं किया जा सकता। उसकी विधिवत जांच होनी चाहिए।

कोर्ट ने मेरठ, आगरा, मुरादाबाद अमरोहा सहित तमाम जिलों के दुकानदारों की याचिकाएं स्वीकार करते हुए केवल एफआईआर दर्ज होने के कारण लाइसेंस निरस्त करने के आदेशों को रद्द कर दिया है और तत्काल दुकान बहाल करने का निर्देश दिया है।

कोर्ट ने कहा अधिकारियों ने लाइसेंस निलम्बित-निरस्त करने में 5 अगस्त 19 के शासनादेश व हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का पालन नहीं किया। यह आदेश न्यायमूर्ति प्रकाश पाड़िया की एकलपीठ ने मेसर्स साजिद, यतीस कुमार सहित कुल 22 याचिकाओं की एक साथ सुनवाई करते हुए दिया है।

कोर्ट के समक्ष विधि प्रश्न था कि क्या एफआईआर दर्ज होने मात्र से बिना विधिवत जांच किए सस्ते गल्ले की दुकान का लाइसेंस निरस्त किया जा सकता है ? याची अधिवक्ता का कहना था कि याची का लाइसेंस जिला आपूर्ति अधिकारी मेरठ ने बिना जांच व सुनवाई का मौका दिए केवल एफआईआर दर्ज होने के आधार पर निरस्त कर दिया। पूरी जांच नहीं की, चार्जशीट नहीं दी और न ही गवाहों का परीक्षण करने दिया। आदेश के खिलाफ अपील भी कमिश्नर ने खारिज कर दी।

कहा गया कि सरकार के 5 अगस्त 19 के शासनादेश का भी पालन नहीं किया जिसमें प्रारम्भिक जांच करना जरूरी है। हाईकोर्ट की पूर्णपीठ के बजरंगी तिवारी केस में दिए गये फैसले का पालन नहीं किया। जिसमें एफआईआर दर्ज होने के आधार पर लाइसेंस निरस्त करने को अवैध करार दिया गया है। इसलिए लाइसेंस निलम्बित-निरस्त करने का आदेश रद्द किया जाय।

राज्य सरकार के अपर महाधिवक्ता अशोक मेहता का तर्क था कि जांच में आधार कार्ड के दुरुपयोग से राशन की ब्लैक मार्केटिंग का खुलासा हुआ और एफआईआर दर्ज की गई है। जिसके आधार पर कार्रवाई की गई है।

कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के हवाले से कहा बिना जांच केवल एफआईआर दर्ज होने के आधार पर दुकान का लाइसेंस निरस्त नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने आदेश रद्द कर सभी याचिकाएं स्वीकार कर ली है।

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