उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक कालिंजर दुर्ग की तलहटी में 30 करोड़ रुपये की लागत से ‘ऋषिकुल वैदिक विलेज’ विकसित किया जाएगा। जिला पंचायत बांदा की इस बहुआयामी परियोजना को 18 बीघा भूमि पर छह चरणों में पूरा किया जाएगा, जिसमें प्रत्येक चरण की लागत लगभग 5 करोड़ रुपये होगी।
जिला पंचायत के अनुसार, यह परियोजना पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर विकसित की जाएगी। इसमें आम नागरिकों से लेकर विभिन्न पेशेवर वर्गों तक को निवेश का अवसर मिलेगा। सर्वेक्षण कार्य 25 दिसंबर 2025 को पूरा किया जा चुका है और प्रस्ताव को जिला पंचायत की आगामी बैठक में अनुमोदन के लिए रखा जाएगा।
🌿 “कांशस लिविंग” पर आधारित अनोखी अवधारणा
‘ऋषिकुल वैदिक विलेज’ केवल पर्यटन स्थल नहीं होगा, बल्कि प्रकृति, आध्यात्मिकता और सतत विकास पर आधारित समग्र जीवन शैली ग्राम होगा। इसका मास्टर प्लान पंचतत्व—पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश—की अवधारणा पर तैयार किया गया है।
परियोजना में ध्यान मंडप, सरस्वती वैदिक केंद्र, नक्षत्र डेक, आवासीय क्लस्टर, हाइड्रोथेरेपी पूल, पंचकर्म यूनिट, यज्ञशाला और कम्युनिटी एम्फीथिएटर जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। यहां सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम भी आयोजित होंगे।
💼 रोजगार और अर्थव्यवस्था को बल
यह प्रोजेक्ट वेलनेस और आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा देगा, साथ ही स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित करेगा। आतिथ्य, कृषि, बागवानी और पारंपरिक हस्तशिल्प से क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
साथ ही पंचधातु से नानाजी देशमुख की प्रतिमा या स्तंभ स्थापित करने का भी प्रस्ताव है, जो इस वैदिक ग्राम की सांस्कृतिक पहचान को और सशक्त बनाएगा।



