अंतरिक्ष से दिखी नीली-हरी रहस्यमय रोशनी
Space Light Phytoplankton | NASA के सैटेलाइट ने ऑस्ट्रेलिया के समुद्र में फाइटोप्लांकटन की वजह से नीली-हरी चमक दर्ज की।
NASA के वैज्ञानिकों ने ऑस्ट्रेलिया के दक्षिणी तट के पास समुद्र में अजीबोगरीब नीली-हरी रोशनी देखी। यह चमक इतनी तेज थी कि इसे NASA के PACE स्पेसक्राफ्ट ने अंतरिक्ष से भी दर्ज किया। शुरुआत में यह घटना रहस्यमय लगी, लेकिन बाद में इसका कारण सामने आया।
चमक का कारण – Space Light Phytoplankton
- यह रोशनी समुद्र में मौजूद फाइटोप्लांकटन नामक सूक्ष्म जीवों के कारण हुई।
- फाइटोप्लांकटन समुद्र में पौधों की तरह काम करते हैं और क्लोरोफिल ‘ए’ की वजह से नीला-हरा रंग फैलाते हैं।
- जब समुद्र में इनकी संख्या बढ़ जाती है, तो वे एक अनोखी चमक पैदा करते हैं।
कैसे बनती है ये रोशनी?
- समुद्री जीवों के मरने पर नाइट्रोजन और फॉस्फोरस जैसे पोषक तत्व निकलते हैं।
- फाइटोप्लांकटन सूरज की रोशनी के साथ इन पोषक तत्वों को सोख लेते हैं।
- इससे उनकी संख्या तेजी से बढ़ती है और समुद्र की सतह पर नीला-हरा ग्लो बन जाता है।
वैज्ञानिकों की राय
फ्लिंडर्स यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक जोचेन केम्फ का कहना है:
- फाइटोप्लांकटन की परत समुद्र में करीब 500 फीट गहराई तक फैल जाती है।
- रोशनी में हरे और नीले रंग की परतें होती हैं।
- यह फर्क समुद्र की तलहटी में मौजूद तलछट और विभिन्न प्रकार के फाइटोप्लांकटन की वजह से होता है।
क्यों जरूरी हैं फाइटोप्लांकटन?
- ये समुद्री इकोसिस्टम का अहम हिस्सा हैं।
- समुद्री जीवन के लिए ये ऑक्सीजन और ऊर्जा का बड़ा स्रोत हैं।
- इनकी मौजूदगी से महासागरों की धाराओं और जलवायु परिवर्तन को समझने में मदद मिलती है।
वैज्ञानिकों के लिए बड़ा अवसर
NASA के आधुनिक सैटेलाइट्स ने इस घटना को बेहद साफ तस्वीरों में कैद किया है।
भविष्य में समुद्री जीवन, जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण पर इनके असर का गहन अध्ययन किया जा सकेगा।
इससे वैज्ञानिक फाइटोप्लांकटन के पैटर्न को समझ पाएंगे।