नेपाल में कैंसर की दवाओं का गंभीर संकट
नेपाल के सबसे बड़े कैंसर उपचार केंद्र वीपी कोइराला मेमोरियल कैंसर अस्पताल में कैंसर की महत्वपूर्ण दवाओं की भारी कमी हो गई है। इस संकट के कारण मरीजों के इलाज पर गंभीर असर पड़ रहा है और अस्पताल प्रशासन चिंता में है।
कीमोथेरेपी उपचार पर पड़ा असर
अस्पताल के मेडिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. गुरुशरण शाह ने बताया कि कार्बोप्लाटिन और सिसप्लाटिन जैसी जरूरी दवाओं की भारी कमी हो गई है। ये दवाएं कैंसर की कीमोथेरेपी में बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।
उन्होंने कहा कि इन दवाओं के बिना प्रभावी उपचार संभव नहीं है और इससे मरीजों की रिकवरी प्रभावित हो सकती है।
वैश्विक सप्लाई संकट बना मुख्य वजह
डॉ. शाह के अनुसार यह संकट केवल नेपाल तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक स्तर पर कैंसर दवाओं की आपूर्ति प्रभावित हुई है। दवाओं के निर्माण में उपयोग होने वाले एपीआई यानी मुख्य कच्चे पदार्थों की कमी इसकी बड़ी वजह बताई जा रही है।
घटिया और अनियमित दवाओं का खतरा
दवाओं की कमी के चलते कई मरीज पड़ोसी देशों या निजी दुकानों से दवाएं खरीद रहे हैं। अस्पताल प्रशासन ने चेतावनी दी है कि कई दवाएं बिना उचित तापमान नियंत्रण के लाई जा रही हैं, जिससे उनकी गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।
विशेषज्ञों ने कहा कि अधिक तापमान में रखी गई कैंसर दवाएं मरीजों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती हैं।
प्रतिदिन 200 मरीजों को होती है जरूरत
अस्पताल में प्रतिदिन लगभग 200 मरीजों को कीमोथेरेपी की आवश्यकता पड़ती है। लेकिन जरूरी दवाओं की कमी के कारण डॉक्टरों को इलाज में समझौता करना पड़ रहा है।
सरकार और WHO से मदद की मांग
अस्पताल प्रशासन ने नेपाल सरकार और विश्व स्वास्थ्य संगठन से मदद मांगी है। अस्पताल के कार्यकारी निर्देशक डॉ. उमेश नेपाल ने बताया कि बच्चों के लिए उपलब्ध कुछ दवाओं को अन्य मरीजों के इलाज में उपयोग करने की अनुमति मांगी गई है।



