राज्यपाल डेका ने 2 अक्टूबर 2026 को भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित करते हुए एक भव्य समारोह का आयोजन किया। यह कार्यक्रम अंबेडकर के योगदान को सम्मानित करने के साथ-साथ उनके विचारों को पुनः जागृत करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया। प्रतिमा के सामने खड़े होकर डेका ने अंबेडकर के समाज सुधार के कार्यों की प्रशंसा की और समाज में समानता व न्याय की आवश्यकता पर बल दिया। इस कार्यक्रम में कई प्रमुख राजनेता, समाजसेवक और शिक्षाविद भी उपस्थित थे, जिन्होंने अंबेडकर के आदर्शों को आगे बढ़ाने के लिए अपने विचार साझा किये।
डेका राज्यपाल की श्रद्धांजलि: अंबेडकर की प्रतिमा पर पुष्पार्पण
समारोह का मुख्य आकर्षण डेका राज्यपाल द्वारा अंबेडकर की प्रतिमा के सामने पुष्पार्पण था। उन्होंने प्रतिमा के सामने खड़े होकर एक छोटी सी प्रार्थना की, जिसके बाद उन्होंने अंबेडकर के जीवन और कार्यों पर एक भावपूर्ण भाषण दिया। भाषण में उन्होंने अंबेडकर की सामाजिक न्याय, शिक्षा और स्वास्थ्य के प्रति समर्पण को प्रमुखता से उजागर किया। डेका ने कहा कि अंबेडकर के सिद्धांत आज भी समाज को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।
अंबेडकर के आदर्शों का पुनः स्मरण: समाज में उनका योगदान
समारोह के दौरान अंबेडकर के कार्यों को स्मरण करने के लिए एक पैनल चर्चा आयोजित की गई। पैनल में समाजशास्त्री, शिक्षाविद और कार्यकर्ता शामिल थे, जिन्होंने अंबेडकर के संविधान में योगदान, दलित अधिकारों के लिए उनके संघर्ष, और शिक्षा के क्षेत्र में उनके प्रयासों पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि कैसे अंबेडकर ने समाज में असमानता को मिटाने के लिए कानूनी और सामाजिक सुधारों का सहारा लिया।
समारोह में प्रमुख अतिथियों का स्वागत: राजनेता एवं समाजसेवक
समारोह में उपस्थित अतिथियों में राज्यपाल, मुख्यमंत्री, केंद्रीय सांसद, समाजसेवक और शिक्षा मंत्री शामिल थे। सभी अतिथियों ने अंबेडकर के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की और समाज में उनके विचारों को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई। अतिथियों ने अंबेडकर के कार्यों के प्रति अपने अनुभव और दृष्टिकोण साझा किये, जिससे कार्यक्रम को एक समृद्ध संवाद मिला।
भविष्य की दिशा: अंबेडकर के सिद्धांतों से प्रेरित विकास योजनाएँ
समारोह के अंत में डेका राज्यपाल ने भविष्य की योजनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अंबेडकर के विचारों को अपनाते हुए शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्र में नई योजनाएँ शुरू की जाएँगी। विशेष रूप से, वे दलित और पिछड़े वर्गों के लिए विशेष कार्यक्रमों की शुरुआत की बात कही। इसके अलावा, वे डिजिटल शिक्षा और ग्रामीण विकास को बढ़ावा देने के लिए नई पहलें भी प्रस्तावित कीं।
निष्कर्ष
डेका राज्यपाल के द्वारा अंबेडकर की प्रतिमा पर पुष्पांजलि और समर्पित कार्यक्रम ने समाज में समानता, न्याय और शिक्षा के महत्व को फिर से उजागर किया। अंबेडकर के आदर्शों को पुनः जागृत करते हुए, यह कार्यक्रम आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।



