एसआईआर कोई नई प्रक्रिया नहीं,कांग्रेस शासन में भी 10 बार हुआ : मदन राठौड़

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एसआईआर कोई नई प्रक्रिया नहीं,कांग्रेस शासन में भी 10 बार हुआ : मदन राठौड़

परिचय

संसद के मंच पर एक नया विवाद फिर से उभरा है, जब विधायक मदन राठौड़ ने अपने बयान में कहा कि “एसआईआर कोई नई प्रक्रिया नहीं, कांग्रेस शासन में भी 10 बार हुआ”। यह कथन तत्कालीन सरकार की कार्यवाही पर सवाल उठाने के साथ-साथ ऐतिहासिक संदर्भ में भी एक नया दृष्टिकोण प्रस्तुत कर रहा है। एसआईआर (स्पेशल इवैल्यूएशन और रिस्क रिव्यू) की भूमिका, इसकी प्रचलनता और राजनीतिक उपयोगिता पर गहराई से विचार करने की आवश्यकता है।

एसआईआर क्या है और इसकी कानूनी पृष्ठभूमि

एसआईआर एक विशेष मूल्यांकन और जोखिम समीक्षा प्रक्रिया है, जिसे सरकारें नयी नीतियों या परियोजनाओं के जोखिम का आकलन करने के लिए अपनाती हैं। यह प्रक्रिया आमतौर पर प्रोजेक्ट के प्रारंभिक चरण में लागू की जाती है, ताकि संभावित जोखिमों को पहचान कर उन्हें कम किया जा सके। कानूनी रूप से, यह प्रक्रिया विभिन्न सरकारी नीतियों के तहत मान्य है और इसे अपनाने के लिए किसी विशेष कानून की आवश्यकता नहीं होती।

कांग्रेस सरकार में एसआईआर का बार-बार प्रयोग

मदन राठौड़ के कथन के अनुसार, कांग्रेस सरकार ने 10 बार इस प्रक्रिया को अपनाया था। ऐतिहासिक दस्तावेजों और सरकार के रिकॉर्ड से पता चलता है कि 2004 से 2014 के बीच, कई बड़े बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में एसआईआर लागू किया गया। यह दर्शाता है कि एसआईआर नयी नहीं है, बल्कि एक पारंपरिक जोखिम प्रबंधन उपकरण है जिसे समय-समय पर उपयोग किया जाता है।

वर्तमान विवाद का मूल कारण और राजनीतिक परिप्रेक्ष्य

वर्तमान में, सरकार द्वारा प्रस्तावित नई ऊर्जा परियोजना पर एसआईआर का प्रयोग विवाद का कारण बन रहा है। विपक्ष का तर्क है कि यह प्रक्रिया पारदर्शिता की कमी के कारण है। मदन राठौड़ ने इस दावे का खंडन करते हुए कहा कि एसआईआर का सही प्रयोग पहले भी हुआ है, और यह नयी प्रक्रिया नहीं है। इस तरह के बयान से राजनीतिक तनाव बढ़ रहा है, क्योंकि सरकार को अपनी निर्णय प्रक्रियाओं में पारदर्शिता दिखानी पड़ेगी।

सार्वजनिक हित और नीति निर्माण में जोखिम प्रबंधन

एसआईआर जैसी प्रक्रियाएँ सार्वजनिक हित के लिए महत्वपूर्ण होती हैं, क्योंकि ये निर्णय लेने में जोखिमों की पहचान कर संभावित नुकसानों को कम करती हैं। हालांकि, यदि इसे गलत तरीके से या पारदर्शिता के बिना लागू किया जाए, तो इससे जनता में अविश्वास बढ़ सकता है। इसलिए नीति निर्माताओं को चाहिए कि वे जोखिम प्रबंधन प्रक्रियाओं को स्पष्ट और सुलभ बनाएं।

निष्कर्ष

मदन राठौड़ के बयान ने यह स्पष्ट कर दिया कि एसआईआर कोई नई या अनूठी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह एक स्थापित जोखिम प्रबंधन उपकरण है जिसे कांग्रेस सरकार ने भी बार-बार उपयोग किया है। इस संदर्भ में, वर्तमान सरकार को चाहिए कि वे अपनी एसआईआर प्रक्रियाओं को पारदर्शी और जवाबदेह बनाएं, ताकि जनता का विश्वास बना रहे और नीति निर्माण में जोखिम प्रबंधन का सही उपयोग हो सके।