सहिया गीता देवी

0
24
सहिया गीता देवी

सहिया गीता देवी, जिनका नाम अब शिक्षा, कला और सामाजिक कार्यों के क्षेत्र में एक प्रेरणास्रोत बन चुका है, 22 अक्टूबर 2026 को अपनी 45वीं वर्षगांठ मनाते हुए, अपने कार्यों के लिए एक बार फिर से राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त किया। 1971 में बिहार के एक छोटे से गाँव में जन्मी, उन्होंने कम उम्र में ही शिक्षा के महत्व को समझ लिया और अपने गाँव की लड़कियों के लिए एक प्राथमिक विद्यालय की स्थापना की। उनकी यह पहल आज तक 500 से अधिक लड़कियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने में सफल रही है। सहिया गीता देवी ने अपने जीवन को समाज के सबसे कमजोर वर्गों की मदद के लिए समर्पित कर दिया है, और उनके प्रयासों ने न केवल शिक्षा के क्षेत्र में बल्कि सामाजिक समावेशन में भी गहरा बदलाव लाया है।

सहिया गीता देवी: समाजसेवा की नई मिसाल

सहिया गीता देवी ने अपने जीवन में शिक्षा, स्वास्थ्य और कला के क्षेत्र में कई पहलें शुरू की हैं। उनके द्वारा संचालित ‘सहारा प्रोजेक्ट’ के तहत, ग्रामीण महिलाओं को स्वच्छता, पोषण और स्वास्थ्य शिक्षा दी जाती है। इसके अलावा, उन्होंने ‘संगीत से सीखो’ कार्यक्रम के माध्यम से ग्रामीण छात्रों को संगीत के माध्यम से सीखने के नए रास्ते दिखाए हैं। यह कार्यक्रम आज तक 2000 से अधिक छात्रों तक पहुँच चुका है और उनकी सफलता की कहानियाँ देशभर में फैल रही हैं।

शिक्षा और सशक्तिकरण के क्षेत्र में उनका योगदान

सहिया गीता देवी ने ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा के स्तर को बढ़ाने के लिए ‘मुफ़्त ट्यूशन’ कैंप चलाए हैं। इसके साथ ही, उन्होंने ‘कौशल विकास’ कार्यशालाएँ भी आयोजित की हैं, जिनमें युवाओं को हस्तकला, कंप्यूटर और उद्यमिता के कौशल सिखाए जाते हैं। इन कार्यक्रमों के जरिए 3000 से अधिक युवाओं ने रोजगार के अवसर पाए हैं। उनकी पहल ने न केवल शिक्षा को बढ़ावा दिया है, बल्कि महिलाओं को भी आर्थिक रूप से सशक्त बनाया है।

संगीत और साहित्य के माध्यम से समाज में बदलाव

संगीत और साहित्य के प्रति उनका गहरा प्रेम उन्हें एक अनोखे कलाकार के रूप में परिभाषित करता है। उन्होंने ‘संगीत से सीखो’ कार्यक्रम के तहत ग्रामीण बच्चों को संगीत के माध्यम से गणित और विज्ञान सिखाने का प्रयोग किया। इसके अलावा, उन्होंने ‘साहित्यिक संवाद’ नामक एक पुस्तक क्लब शुरू किया, जहाँ ग्रामीण वयस्क साहित्य पढ़ते हैं और अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हैं। इस कार्यक्रम से ग्रामीण समाज में साहित्य के प्रति जागरूकता बढ़ी और सांस्कृतिक पहचान मजबूत हुई।

आने वाले प्रोजेक्ट्स और भविष्य की योजनाएँ

सहिया गीता देवी की योजनाओं में ‘हर गाँव में एक पुस्तकालय’ और ‘डिजिटल शिक्षा केंद्र’ शामिल हैं। वे 2027 तक 50 नए पुस्तकालय खोलने का लक्ष्य रखती हैं, जिससे ग्रामीण बच्चों को पुस्तकें और डिजिटल संसाधनों तक पहुँच मिलेगी। साथ ही, वे ‘संगीत और विज्ञान’ के संयोजन से एक नया पाठ्यक्रम भी विकसित कर रही हैं, जो युवा पीढ़ी को विज्ञान के प्रति आकर्षित करेगा। उनकी इन योजनाओं के माध्यम से वे ग्रामीण समाज को एक समग्र रूप से विकसित करने का प्रयास कर रही हैं।

निष्कर्ष

सहिया गीता देवी की उपलब्धियाँ हमें यह सिखाती हैं कि एक व्यक्ति की दृढ़ता और समर्पण से समाज में बड़ा परिवर्तन संभव है। उनकी शिक्षा, कला और सामाजिक कार्यों की पहल ने लाखों लोगों के जीवन में उजाला लाया है। उनका कार्य हमें प्रेरित करता है कि हम भी अपने समाज के लिए कुछ नया और सकारात्मक करें। सहिया गीता देवी की कहानी हमें याद दिलाती है कि बदलाव का मार्ग शिक्षा, कला और समर्पण से ही संभव है।