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संत रविदास अखाड़ा को प्रयागराज महाकुंभ में नहीं मिली जमीन

प्रयागराज महाकुंभ में दर—दर भटकने को मजबूर दलित समाज के संत

महाकुंभनर, 08 जनवरी (हि.स.)। प्रयागराज महाकुंभ में विविध मत पंथ व सम्प्रदाय के संतों का आगमन हो चुका है। वहीं अधिकांश अखाड़ों का मेला क्षेत्र में प्रवेश भी हो चुका है। विभिन्न अखाड़ों व आश्रमों से जुड़े साधु संतों ने अपनी धूनी भी रमा ली है। वहीं अखिल भारतीय संत रविदास अखाड़ा को अभी तक प्रयागराज महाकुंभ में जमीन ही नहीं मिल पायी है। इसलिए देश के विभिन्न हिस्सों से आये दलित समाज के संत भीषण ठंड में दर—दर भटकने को मजबूर हैं।

अखिल भारतीय रविदास अखाड़ा के प्रमुख सदाजप महाराज ने हिन्दुस्थान समाचार को बताया कि संत रविदास अखाड़ा 1980 से लेकर उज्जैन कुंभ, हरिद्वार कुंभ और नासिक के कुंभ में शिविर लगाकर संत समाज की सेवा करता आया है। नासिक, उज्जैन व हरिद्वार में लगे कुंभ में रविदास अखाड़ा को जमीन के अलावा अन्य सुविधाएं मिलती रही हैं।

संत सदाजप महाराज ने बताया कि प्रयागराज मेला प्राधिकरण को जमीन मुहैया कराने के लिए आवेदन किया था। इसके लिए एक सप्ताह से अधिक समय तक हम प्रयागराज मेला प्राधिकरण का चक्कर काट रहे हैं। मेलाधिकारी विजय किरन आनन्द ने हमारा आवेदन यह कह कर लौटा दिया कि जमीन नहीं है।

अशोक सिंहल की प्रेरणा से बना रविदास अखाड़ा

रविदास अखाड़ा के प्रमुख सदाजप महाराज विश्व हिन्दू परिषद से जुड़े हैं। राम मंदिर आन्दोलन में उन्होंने काम किया है। विश्व हिन्दू परिषद के अध्यक्ष रहे अशोक सिंहल की प्रेरणा से अखिल भारतीय रविदास अखाड़ा की स्थापना 1980 में उज्जैन में उन्होंने की थी। उज्जैन में कई रविदास मंदिरों का निर्माण अखाड़ा ने कराया है। समाज में सामाजिक समरसता के निर्माण व दलित समाज में हिन्दू धर्म व हिन्दू संस्कृति के प्रति स्वाभिमान जाग्रत करने के उद्देश्य से इस अखाड़े के संत काम करते हैं।

अखाड़े से जुड़े हैं दस हजार से अधिक संत

अखिल भारतीय रविदास अखाड़ा से देशभर में दस हजार से अधिक साधु संत जुड़े हुए हैं। जमीन न मिल पाने की वजह से अभी तक रविदास अखाड़ा का शिविर नहीं लग सका है। महाकुंभ में कल्पवास करने दलित समाज के श्रद्धालु भी बड़ी संख्या में आते हैं। रविदास अखाड़ा का शिविर न लग पाने की वजह से दलित समाज के कल्पवासी असमंजस में हैं।

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