🌸 सावित्रीबाई फुले – शिक्षा और समानता की मशाल
भारतीय सामाजिक इतिहास में 03 जनवरी का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसी दिन वर्ष 1831 में सावित्रीबाई फुले का जन्म हुआ था। वे भारत की पहली महिला शिक्षिका, पहली मराठी कवयित्री और महिला शिक्षा की सबसे सशक्त अग्रदूत थीं।
उस दौर में जब लड़कियों और दलितों को पढ़ाना अपराध जैसा माना जाता था, सावित्रीबाई फुले ने शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का सबसे बड़ा हथियार बनाया।
📚 भारत का पहला बालिका विद्यालय
अपने पति महात्मा ज्योतिराव फुले के साथ मिलकर उन्होंने वर्ष 1848 में पुणे में देश का पहला बालिका विद्यालय स्थापित किया।
यह भारतीय समाज के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ था।
पढ़ाने जाते समय उन पर
- कीचड़ फेंका गया
- गालियां दी गईं
- धमकियां मिलीं
फिर भी उन्होंने शिक्षा का दीप बुझने नहीं दिया।
✊ महिला और दलित अधिकारों की योद्धा
सावित्रीबाई फुले ने
- विधवा पुनर्विवाह
- बाल विवाह विरोध
- दलित शिक्षा
- महिला सशक्तिकरण
के लिए जीवनभर संघर्ष किया। उन्होंने समाज को बताया कि
“शिक्षा ही सबसे बड़ा शस्त्र है।”
✍️ कवयित्री और विचारक
वे मराठी भाषा की पहली महिला कवयित्री भी थीं। उनकी कविताओं में
- समानता
- आत्मसम्मान
- शिक्षा
- मानवता
का सशक्त संदेश मिलता है।
🕊 प्लेग पीड़ितों की सेवा करते हुए बलिदान
वर्ष 1897 में जब प्लेग फैला, तब सावित्रीबाई फुले ने स्वयं पीड़ितों की सेवा की। इसी सेवा के दौरान वे संक्रमित हुईं और उनका निधन हो गया।
उन्होंने मानवता के लिए अपना जीवन अर्पित कर दिया।
🌍 आज भी जीवित है उनकी प्रेरणा
सावित्रीबाई फुले का जीवन
साहस, करुणा और समानता
की अमर मिसाल है। आज भी उनका संघर्ष
लड़कियों, दलितों और वंचित वर्गों के लिए
प्रेरणा बना हुआ है।




