▶️ गोरखपुर की बदली तस्वीर
गोरखपुर शिक्षा चिकित्सा हब के रूप में तेजी से उभर रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पिछले नौ वर्षों में यहां शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़े बदलाव देखने को मिले हैं।
▶️ विश्वविद्यालयों की बढ़ी संख्या
2017 से पहले गोरखपुर में केवल दो प्रमुख विश्वविद्यालय थे—दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय और मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय।
अब इसमें कई नए संस्थान जुड़े हैं, जिनमें महायोगी गुरु गोरखनाथ राज्य आयुष विश्वविद्यालय प्रमुख है, जो प्रदेश का पहला आयुष विश्वविद्यालय है।
इसके अलावा निजी क्षेत्र में महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय भी स्थापित हुआ है। जल्द ही वानिकी और औद्यानिकी विश्वविद्यालय की स्थापना भी प्रस्तावित है।
▶️ शिक्षा का बढ़ता आकर्षण
गोरखपुर अब पारंपरिक से लेकर तकनीकी, मेडिकल और व्यावसायिक शिक्षा का प्रमुख केंद्र बन गया है।
यहां सैनिक स्कूल और अटल आवासीय विद्यालय जैसी सुविधाएं भी विकसित हुई हैं, जिससे आसपास के जिलों के साथ-साथ बिहार से भी छात्र यहां पढ़ने आ रहे हैं।
▶️ चिकित्सा क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव
गोरखपुर शिक्षा चिकित्सा हब बनने की दिशा में स्वास्थ्य सेवाओं में भी बड़ा सुधार हुआ है।
पहले जहां केवल बीआरडी मेडिकल कॉलेज ही प्रमुख केंद्र था, अब अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), गोरखपुर की स्थापना से क्षेत्र को बड़ी राहत मिली है।
इसके अलावा सरकारी अस्पतालों के साथ निजी क्षेत्र के अस्पताल भी तेजी से विकसित हो रहे हैं, जहां जटिल बीमारियों का इलाज संभव हो रहा है।
▶️ आयुष और आधुनिक चिकित्सा का संगम
आयुष विश्वविद्यालय के माध्यम से पारंपरिक चिकित्सा पद्धति को भी बढ़ावा मिला है, जिससे पूर्वांचल के साथ नेपाल और बिहार के मरीजों को लाभ मिल रहा है।



