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बाबा का अजब हठयोग, कड़ाके की ठंड में कर रहे हैं 41 दिन की जलधारा तपस्या

महाकुंभ नगर,05 जनवरी(हि. स.)।साधना,तपस्या, हठयोग का अद्भुत समागम संगम की रेती पर देखने को मिल रहा है। कुछ बाबाओं का अजब हठयोग तो आश्चर्य चकित कर देता है। इस बार महाकुंभ में आये बाबा गोपीनाथ भी कुछ ऐसा ही कर रहे हैं। इस कड़ाके की ठंड में लोग जहां नहाने से पहले भी कई बार सोचते हैं,वहीं बाबा 41 दिन की कठिन जलधारा तपस्या कर रहे हैं।

सहारनपुर के गांव बितिया के श्री नवनाथ 84 सिद्ध 64 योगिनी मंदिर से महाकुंभ पहुंचे औघड़ पीर बाबा गौरीनाथ अपनी आठवीं जलधारा तपस्या पर महाकुंभ में बैठे हैं। इस बार महाकुंभ में बाबा गौरीनाथ की 41 दिन की जलधारा तपस्या शुरू हो गई है। इस हठयोग में सबसे पहले शाम के 7:00 बजे 109 कलश को ठंडे पानी से पूजा पाठ और भोग लगाकर भर कर रख दिए जाते हैं। इसके बाद रात 2 बजे से जलधारा तपस्या शुरू होती है।उनके सिर पर एक-एक करके ठंडे पानी का कलश डाला जाता है और लगभग 2 घंटे तक गौरीनाथ इस ठंडे पानी से नहाते हैं। उसके बाद भगवान शिव के ऊपर जलाभिषेक किया जाता है। बाबा गौरीनाथ का यह हठयोग उनकी गुरु परम्परा का हिस्सा है जो कि इसके पहले उनके गुरु बाबा हीरानाथ किया करते थे। बाबा गौरीनाथ प्रत्येक वर्ष दिसंबर महीने में ठंडे पानी की इस जल धारा तपस्या को करते हैं।

बाबा गौरीनाथ ने बताया कि ये अष्टम जलधारा तपस्या है। यह जलधारा तपस्या दिसंबर महीने में 25 दिसंबर से शुरू होती है 3 फरवरी में इसका समापन किया जाता है। जो कि उनके आश्रम में शुरू हुई है और इस समय वह महाकुंभ में इसे कर रहे हैं। इसका समापन 3 फरवरी को यहीं महाकुंभ में होगा।

बाबा गौरीनाथ बताते हैं कि इस तपस्या को करने का मकसद अपने शरीर को साधना है। इससे पहले उनके गुरु हीरानाथ ने इस जलधारा तपस्या को किया करते थे और इस परंपरा को अब वह आगे बढ़ा रहे हैं।

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