🔹 हाईकोर्ट में फिर शुरू हुई सुनवाई
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट इंदौर खंडपीठ में धार स्थित भोजशाला के धार्मिक स्वरूप को लेकर चल रहे विवाद पर सुनवाई दोबारा शुरू हुई।
मामले में हिंदू पक्ष ने इसे वाग्देवी मंदिर बताया।
🔹 हदीस का दिया गया हवाला
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनीष गुप्ता ने इस्लामी सिद्धांत हदीस का हवाला देते हुए कहा कि
जबरन कब्जे की जमीन पर बनी मस्जिद मान्य नहीं होती।
उन्होंने तर्क दिया कि हिंदू कानून के अनुसार मंदिर का स्वरूप स्थायी होता है।
🔹 राजा भोज के ऐतिहासिक प्रमाण पेश
अदालत में वर्ष 1908 के राजपत्र और राजा भोज की पुस्तकों का उल्लेख किया गया।
इनमें हवन कुंड और मंदिर संरचना से जुड़े विवरण भोजशाला से मेल खाते बताए गए।
🔹 मूर्तियों और सर्वे रिपोर्ट का हवाला
हिंदू पक्ष ने दावा किया कि भोजशाला परिसर से 150 से अधिक देवी-देवताओं की मूर्तियां मिली हैं।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया कि
ऐसे साक्ष्य किसी मस्जिद में संभव नहीं हैं।
🔹 वाग्देवी मूर्ति का उल्लेख
अदालत को बताया गया कि ब्रिटिश संग्रहालय में रखी वाग्देवी की मूर्ति भोजशाला से ले जाई गई थी।
इस पर अंकित विवरण राजा भोज से जुड़े होने का दावा करता है।
🔹 24 घंटे पूजा की मांग
याचिकाकर्ता ने अदालत से भोजशाला में 24 घंटे पूजा की अनुमति देने की मांग की है।
साथ ही इसे मंदिर घोषित करने की भी अपील की गई।
🔹 आगे भी जारी रहेगी सुनवाई
इस मामले में कुल चार याचिकाएं और एक अपील लंबित हैं।
अदालत में सभी पर एक साथ सुनवाई जारी है और अगली सुनवाई भी तय है।



