नेपाल में बढ़ा राजनीतिक विवाद
नेपाल में सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक तनाव तेज हो गया है। विपक्षी दलों ने संसद में आठों अध्यादेश को अस्वीकार करने की तैयारी शुरू कर दी है। इससे सरकार पर कानूनी और राजनीतिक दबाव बढ़ गया है।
संसद में दर्ज कराई गई सूचना
विपक्षी दलों ने संघीय संसद के दोनों सदनों में आठों अध्यादेश को लेकर अस्वीकृति की सूचना दर्ज कराई है। बताया जा रहा है कि राष्ट्रीय सभा में इन्हें रोकने की रणनीति बनाई गई है।
संविधान में क्या है प्रावधान
नेपाल के संविधान के अनुसार, किसी भी अध्यादेश को संसद के दोनों सदनों से मंजूरी मिलना जरूरी है। यदि एक भी सदन आठों अध्यादेश को अस्वीकार कर देता है, तो वह स्वतः निष्क्रिय हो जाएगा।
विपक्ष की अलग-अलग रणनीति
सीपीएन-यूएमएल ने आठों अध्यादेश के खिलाफ सूचना दी है। वहीं कांग्रेस और नेकपा ने कुछ चुनिंदा अध्यादेशों को निशाना बनाया है। हालांकि विपक्षी दल साझा रणनीति बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
सरकार के लिए बढ़ी मुश्किल
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आठों अध्यादेश निष्क्रिय हो जाते हैं, तो पुराने कानूनी प्रावधान फिर लागू हो जाएंगे। इससे सरकार की कई योजनाओं पर असर पड़ सकता है।
छोटे दलों को भी साथ लाने की कोशिश
विपक्ष अब छोटे दलों को भी अपने साथ जोड़ने में लगा है। यदि सभी दल एकजुट हो जाते हैं, तो संसद में आठों अध्यादेश को अस्वीकार करने की संभावना और मजबूत हो सकती है।



