रांची टेंडर घोटाले में बड़ा घटनाक्रम
झारखंड के चर्चित रांची टेंडर घोटाला मामले में नया मोड़ सामने आया है। ग्रामीण विकास विभाग से जुड़े धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) मामले में अधिशाषी अभियंता सिद्धांत कुमार ने रांची सिविल कोर्ट स्थित पीएमएलए विशेष अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया।
अदालत से मिली सशर्त जमानत
आत्मसमर्पण के तुरंत बाद अदालत ने सिद्धांत कुमार को सशर्त जमानत दे दी। कोर्ट ने एक लाख रुपये के निजी मुचलके पर राहत देते हुए पासपोर्ट जमा करने और बिना अनुमति देश छोड़कर न जाने का निर्देश दिया है। साथ ही जांच एजेंसियों के साथ सहयोग करने की शर्त भी लगाई गई है।
ईडी ने लगाए गंभीर आरोप
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का आरोप है कि ग्रामीण विकास विभाग में टेंडर आवंटन प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर अनियमितताएं की गईं। एजेंसी के अनुसार नियमों की अनदेखी, मिलीभगत और कमीशनखोरी के जरिए सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाया गया।
कई अधिकारी और ठेकेदार जांच के दायरे में
ईडी इस मामले में पहले ही कई अधिकारियों और ठेकेदारों को जांच के घेरे में ले चुकी है। हाल ही में एजेंसी ने प्रमोद कुमार समेत 14 आरोपितों के खिलाफ पूरक आरोप पत्र दाखिल किया था, जिसके बाद अदालत ने सभी को समन जारी किए थे।
2023 से जारी है जांच
यह मामला वर्ष 2023 से जांच के दायरे में है। ईडी ने पहली बार कई इंजीनियरों और ठेकेदारों के ठिकानों पर छापेमारी कर दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड जब्त किए थे। इसके बाद मई 2024 में दूसरी बड़ी कार्रवाई के दौरान भी कई अहम वित्तीय दस्तावेज मिलने का दावा किया गया।
आगे भी जारी रहेगी जांच
जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि टेंडर प्रक्रिया में किन स्तरों पर गड़बड़ियां हुईं और इसमें किन लोगों की भूमिका रही। मामले में कई अन्य आरोपित भी कोर्ट में आत्मसमर्पण कर चुके हैं और उन्हें भी शर्तों के साथ जमानत मिल चुकी है।


